जानिए आज का पंचांग और क्या है सायटिका से राहत के उपाय
आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 3 सितम्बर 2024
दिन – मंगलवार
विक्रम संवत् – 2081
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास – भाद्रपद
पक्ष – कृष्ण
तिथि – अमावस्या प्रातः 07:24 तक तत्पश्चात प्रतिपदा
नक्षत्र – पूर्व फाल्गुनी रात्रि 03:10 सितम्बर 4 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी
योग – सिद्ध शाम 07:05 तक तत्पश्चात साध्य
राहु काल – दोपहर 03:47 से शाम 05:21 तक
सूर्योदय – 06:23
सूर्यास्त – 06:55
दिशा शूल – उत्तर दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:51 से प्रातः 05:37 तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:14 से दोपहर 01:04 तक
निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:16 सितम्बर 04 से रात्रि 01:02 सितम्बर 04 तक
विशेष – प्रतिपदा को कुष्मांड (कुम्हड़ा, पेठा) न खायें क्योंकि यह धन का नाश करनेवाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
सायटिका
- सायटिका या गृध्रसी नसों में होनेवाला ऐसा दर्द है जिसमें मरीज को सबसे पहले कूल्हे में दर्द होता हैं और फिर धीरे-धीरे यह दर्द नसों से होते हुए दोनों पैरों में बढ़ता है । इससे उठने – बैठने व चलने – फिरने में दिक्कत होती है । यह कोई रोग नहीं है बल्कि रीढ़ से संबंधित कुछ रोगों का लक्षण हो सकता है । कभी-कभी गर्भावस्था के कारण भी दर्द शुरू हो सकता है ।
- अधिक मेहनत करने या भारी वजन उठाने, अनुचित जीवनशैली व खान-पान, उठने-बैठने की गलत मुद्रा एवं रुखा, शीतल व आवश्यकता से कम मात्रा में आहार, अति संसार-व्यवहार, अधिक व्यायाम, चिंतित रहना, मल-मूत्र आदि के वेगों को रोकना, शरीर में कच्चा रस बनना आदि कारणों से भी यह दर्द हो सकता है ।
कैसे पायें सायटिका से राहत ?
अधिकांश मामलों में कमर की गद्दी के अपने स्थान से खिसकने के कारण सायटिका का दर्द होना पाया जाता है । इसमें चिकित्सक की सलाह के अनुसार १५ दिनों से २ महीनों तक सिर्फ थोडा विश्राम करने और हलकी कसरत एवं योगासन जैसे की मकरासन, भुजंगासन, वज्रासन आदि का सहारा लेने से काफी लोगों को फायदा मिल जाता है ।
सायटिका में लाभदायी अन्य प्रयोग
आसानी से प्राप्त हो जाने वाली सायटिका में उत्तम लाभ देनेवाली औषधियाँ :
- अश्वगंधा चूर्ण व टेबलेट : २ से ४ ग्राम अश्वगंधा चूर्ण या २ – ४ अश्वगंधा टेबलेट सुबह खाली पेट दूध के साथ लें ।
- वज्र रसायन टेबलेट : आधी से एक गोली देशी गाय के दूध, घी अथवा शुद्ध शहद के साथ सुबह खाली पेट लें ।
- स्पेशल मालिश तेल : इससे दिन में १ – २ बार हलके हाथों से मालिश करके गर्म कपड़े से सिंकाई करें ।
- संधिशूलहर योग चूर्ण : २ चम्मच चूर्ण रात को १ गिलास पानी में भिगों दें । सुबह इसे उबालें । आधा पानी शेष रहने पर छान के पियें ।
अनुभूत घरेलू प्रयोग :
- पारिजात के १० – १५ पत्ते ३०० मि.ली. पानी में उबालें । २०० मि.ली. पानी शेष रहने पर छानें और २५ – ५० मि.ग्राम केसर घोंटकर इस पानी में घोल दें । १०० मि.ली. सुबह – शाम पियें । १५ दिन तक पीने से सायटिका जड़ से चला जाता है । स्लिप्ड डिस्क में भी यह प्रयोग रामबाण उपाय है । (वसंत ऋतु में पारिजात के पत्ते गुणहीन होते हैं । अत: यह प्रयोग वसंत ऋतु में लाभ नहीं करता । 2023 में वसंत ऋतु 19 फरवरी से 20 अप्रैल तक है ।)
- वैद्कीय सलाहनुसार उचित आहार-विहार, पंचकर्म-चित्किसा, आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन आदि से संतोषकारक परिणाम मिलते हैं ।
सावधानियाँ :
- वायुवर्धक पदार्थ जैसे – आलू, मटर, चना, अरहर की दाल, बासी भोजन, अति ठंडा पानी आदि से तथा अति उपवास से बचें ।
- पेट में कब्ज, गैस आदि न होने दें एवं प्रसन्न रहें ।
- कमोड शौचालय का प्रयोग करें, ऊँची एडी की चप्पल न पहनें, अधिक दर्द होने पर शरीर को आराम दें एवं मुलायम गद्दे पर न सोयें ।
