जानिए आज का पंचांग और कुछ कही अनकही बातें
आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 5 सितम्बर 2024
दिन – गुरुवार
विक्रम संवत् – 2081
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास – भाद्रपद
पक्ष – शुक्ल
तिथि – द्वितीया दोपहर 12:21 तक तत्पश्चात तृतीया
नक्षत्र – हस्त पूर्ण रात्रि तक
योग – शुभ रात्रि 09:08 तक तत्पश्चात शुक्ल
राहु काल – दोपहर 02:12 से दोपहर 03:45 तक
सूर्योदय – 06:27
सूर्यास्त – 06:49
दिशा शूल – दक्षिण दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:51 से प्रातः 05:37 तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:13 से 01:03 तक
निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:15 सितम्बर 06 से रात्रि 01:01 सितम्बर 06 तक
व्रत पर्व विवरण – सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:14 से प्रातः 06:23 तक), सामवेद उपकर्म, शिक्षक दिवस
विशेष – द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध व तृतीया को परवल खाना शत्रु वृद्धि करता है |(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
बुद्धि का विकास और नाश कैसे होता है ?
बुद्धि का नाश कैसे होता है और विकास कैसे होता है ? विद्यार्थियों को तो खास समझना चाहिए न ! बुद्धि नष्ट कैसे होती है ? बुद्धि: शोकेन नश्यति । भूतकाल कि बातें याद करके ‘ऐसा नहीं हुआ, वैसा नही हुआ…’ ऐसा करके जो चिंता करते हैं न, उनकी बुद्धि का नाश होता है । और ‘मैं ऐसा करके ऐसा बनूंगा, ऐसा बनूंगा…’ यह चिंतन बुद्धि-नाश तो नहीं करता लेकिन बुद्धि को भ्रमित कर देता है । और ‘मैं कौन हूँ ? सुख-दुःख को देखनेवाला कौन ? बचपन बीत गया फिर भी जो नहीं बीता वह कौन ? जवानी बदल रही है, सुख-दुःख बदल रहा है, सब बदल रहा है, इसको जाननेवाला मैं कौन हूँ ? प्रभु ! मुझे बताओ…’ इस प्रकार का चिंतन, थोड़ा अपने को खोजना, भगवान के नाम का जप और शास्त्र का पठन करना – इससे बुद्धि ऐसी बढ़ेगी, ऐसी बढ़ेगी कि दुनिया का प्रसिद्द बुद्धिमान भी उसके चरणों में सिर झुकायेगा ।
बुद्धि बढ़ाने के ४ तरीके
- शास्त्र का पठन
- भगवन्नाम-जप, भगवद-ध्यान
- आश्रम आदि पवित्र स्थानों में जाना
- ब्रह्मवेत्ता महापुरुष का सत्संग-सान्निध्य
- जप करने से, ध्यान करने से बुद्धि का विकास होता है ।
ज्यादा सुखी – दु:खी होना यह कम बुद्धिवाले का काम है । जैसे बच्चे की कम बुद्धि होती है तो जरा- से चॉकलेट में, जरा-सी चीज में खुश हो जाता है, और जरा-सी चीज हटी तो दु:खी हो जाता है । वही जब बड़ा होता है तो चार आने का चॉकलेट आया तो क्या, गया तो क्या ! ऐसे ही संसार की जरा-जरा सुविधा में जो अपने को भाग्यशाली मानता है उसकी बुद्धि का विकास नहीं होता और जो जरा-से नुकसान में आपने को अभागा मानता है उसकी बुद्धि मारी जाती है । अरे ! यह सब सपना है, आता-जाता है । जो रहता है, उस नित्य तत्त्व में जो टिके उसकी बुद्धि तो गजब की विकसित होती है ! सुख-दुःख में, लाभ-हानि में, मान-अपमान में सम रहना तो बुद्धि परमात्मा में स्थित रहेगी और स्थित बुद्धि ही महान हो जायेगी ।
