जानिए आज का पंचांग और वायुवात निवारण हेतु जरूरी तथ्य

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 आज का हिन्दू पंचांग 

दिनांक – 10 सितम्बर 2024

दिन – मंगलवार

विक्रम संवत् – 2081

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – शरद

मास – भाद्रपद

पक्ष – शुक्ल

तिथि – सप्तमी रात्रि 11:11 तक तत्पश्चात अष्टमी

नक्षत्र – अनुराधा रात्रि 08:04 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा

योग – विष्कम्भ रात्रि 12:31 सितम्बर 11 तक तत्पश्चात प्रीति

राहु काल – दोपहर 03:42 से शाम 05:15 तक

सूर्योदय – 06:25

सूर्यास्त – 06:48

दिशा शूल – उत्तर दिशा में

ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक

अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से दोपहर 01:01 तक

निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:13 सितम्बर 11 से रात्रि 01:00 सितम्बर 11 तक

व्रत पर्व विवरण – ललिता सप्तमी, जयेष्ठ गौरी आह्वाहन

विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ते हैं और शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

अपनी प्रकृति अनुसार करें आहार सेवन

  1. मानवीय प्रकृति में जिस दोष की प्रधानता होती है उसके प्रकोपजन्य व्याधियाँ होने की सम्भावना अधिक होती है ।
  2. प्रकृति के विरुद्ध गुण का सेवन ही स्वास्थ्यवर्धक होता है । (च. सं., सूत्रस्थान ७.४१) इसलिए अपनी प्रकृति का निश्चय कर उसके अनुसार आहार-विहार का सेवन करना चाहिए ।
  3. सभी आहार द्रव्यों का लाभ प्राप्त करने हेतु पदार्थ जिस दोष को बढ़ाता है उसके शमनकारी पदार्थों का युक्तिपूर्वक संयोग कर सेवन करना हितकर है । जैसे- पालक वायुवर्धक है तो उसके साथ में वायुशामक सोआ डाला जाता है, अदरक, लहसुन, काली मिर्च, हींग आदि द्रव्यों के उपयोग से दालों व सब्जियों के तथा तेल, घी, नमक के द्वारा जौ, मकई आदि अनाजों के वायुवर्धक गुण का शमन किया जाता है ।

आहार द्वारा वायु को संतुलित कैसे रखें ?

  • प्रकुपित वायु बल, वर्ण और आयु का नाश कर देती है । मन में अस्थिरता, दीनता, भय, शोक उत्पन्न करती है।
  • अकेले वात के प्रकोप से ८० प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। प्रकुपित वायु का पित्त व कफ के साथ संयोग होने से उत्पन्न होनेवाले रोग असंख्य हैं । वायु अतिशय बलवान व आशुकारी (शीघ्र काम करनेवाली) होने से उससे उत्पन्न होनेवाले रोग भी बलवान व शीघ्र घात करने वाले होते हैं। अतः वायु को नियंत्रण में रखने के लिए आहार में वायुवर्धक व वायुशामक पदार्थों का युक्तियुक्त उपयोग करना चाहिए।

वायुशामक पदार्थ

  • अनाजों में : साठी के चावल, गेहूँ, बाजरा, तिल
  • दालों में : कुलथी, उड़द
  • सब्जियों में : बथुआ, पुनर्नवा (साटोडी), परवल, कोमल मूली, कोमल (बिना बीज के) बैंगन, पका पेठा, सहजन की फली, भिंडी, सूरन, गाजर, शलगम, पुदीना, हरा धनिया, प्याज, लहसुन, अदरक
  • फलों में : सूखे मेवे, अनार, आँवला, बेल, आम, नारंगी, बेर, अमरूद, केला, अंगूर, मोसम्बी, नारियल, सीताफल, पपीता, शहतूत, लीची, कटहल (पका), फालसा, खरबूजा, तरबूज
  • मसालों में : सोंठ, अजवायन, सौंफ, हींग, काली मिर्च, पीपरामूल, जीरा, मेथीदाना, दालचीनी, जायफल, लौंग, छोटी इलायची ।

अन्य वायुशामक पदार्थ

  • केसर, सेंधा नमक, काला नमक, देशी गाय का दूध एवं घी, सभी प्रकार के तेल [बरें (कुसुम्भ, कुसुम) का तेल छोड़कर ]

वायुवर्धक पदार्थ

  • अनाजों में : जौ, ज्वार, मकई
  • दालों में : सेम, मटर, राजमा, चना, तुअर, मूँग (अल्प वायुकारक), मोठ, मसूर ।
  • सब्जियों में : अरवी, ग्वारफली, सरसों, चौलाई, पालक, पकी मूली, पत्तागोभी, लौकी, ककड़ी, टिंडा
  • फलों में : नाशपाती, जामुन, सिंघाड़ा, कच्चा आम, मूँगफली ।

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