जानिए आज का पंचांग एवम स्वास्थ्य से संबंधित रोचक जानकारी
आज का हिन्दू पंचांग
दिनांक – 28 अगस्त 2024
दिन – बुधवार
विक्रम संवत् – 2081
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास – भाद्रपद
पक्ष – कृष्ण
तिथि – दशमी रात्रि 01:19 अगस्त 29 तक तत्पश्चात एकादशी
नक्षत्र – मृगशिरा दोपहर 03:53 तक तत्पश्चात आर्द्रा
योग – वज्र शाम 07:12 तक तत्पश्चात सिद्धि
राहु काल – दोपहर 12:41 से दोपहर 02:16 तक
सूर्योदय – 06:21
सूर्यास्त – 07:01
दिशा शूल – उत्तर दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:50 से 05:35 तक
अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं
निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:18 अगस्त 29 से रात्रि 01:03 अगस्त 29 तक
व्रत पर्व विवरण – सर्वार्थ सिद्धि योग (प्रातः 06:21 से दोपहर 03:53 तक)
विशेष – दशमी को कलंबी शाक त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
जैविक घड़ी के अनुसार दिनचर्या
- ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यो ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है। अतः सुबह एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखें जिससे नीचे बताये समय में खुलकर भूख लगे ।
- प्रातः ३ से ५ -इस समय जीवनीशक्ति फेफड़ों में सक्रिय होती है।
- इस समयावधि में थोड़ा गुनगुना पानी पीकर ‘खुली हवा’ में घूमना एवं प्राणायाम करना चाहिए ।
- सुबह : ५ से ७ (बड़ी आँत में) – प्रातः जागरण से लेकर सुबह ७ बजे के बीच मल त्याग व स्नान कर लें । ५ से ७ (सुबह ७ बजे के बाद जो मल त्याग करते हैं उन्हें अनेक बीमारियाँ घेर लेती हैं ।)
- सुबह ७ से ९ : (आमाशय या जठर में)- दूध या फलों का रस या कोई पेय पदार्थ ले सकते हैं । (भोजन के २ घंटे पूर्व)
- सुबह ९ से ११ : (अग्न्याशय व प्लीहा में) – यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है ।
- दोपहर ११ से १ : (हृदय में)- दोपहर १२ बजे के आसपास (मध्यह्न- संध्या) ध्यान, जप करें । भोजन वर्जित है ।
- दोपहर १ से ३ : (छोटी आँत में)- भोजन के करीब २ घंटे बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए ।
- दोपहर ३ से ५ : (मूत्राशय में)- २-४ घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र त्याग की प्रवृत्ति होगी ।
- शाम ५ से ७ : गुर्दों में (Kidneys)- इस समय हलका भोजन कर लेना चाहिए । सूर्यास्त के १० मिनट पहले से १० मिनट बाद तक (संध्याकाल में) भोजन न करें अपितु संध्या करें ।
- रात्रि ७ से ९ : (मस्तिष्क में)- इस समय मस्तिष्क विशेषरूप से सक्रिय रहता है । अतः पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है ।
- रात्रि ९ से ११ : (मेरूरज्जु में)- इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांतिप्रदान करती है ।
- रात्रि ११ से १ : (पित्ताशय में)- इस काल में जागरण पित्त बढ़ाता है ।
- रात्रि १ से ३ : (यकृत में)- इस काल में जागरण से पाचनतंत्र बिगड़ता है ।
